Phir Murli Adhar Dharo Girdhari-Anuradha Paudwal
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फिर मुरली अधर धरो गिरधारी
फिर मुरली अधर धरो गिरधारी
फिर यमुना तट आओ कान्हा
फिर यमुना तट आओ कान्हा
राह तके पनिहारी
फिर मुरली अधर धरो गिरधारी
फिर मुरली अधर धरो गिरधारी
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम
ये वंशीवट, ये नंदनवन, सब यही गोपी ग्वाल तुम्हारे
सब यही गोपी ग्वाल तुम्हारे
आओ फिर से धेनु चराओ, बाट निहारे सांझ साकारे
बाट निहारे सांझ साकारे
फिर बंसी की टेर लगाओ, ओ गोपालनहारी
फिर मुरली अधर धरो गिरधारी
फिर मुरली अधर धरो गिरधारी
फिर तुम मेरी मटकी फोड़ो, फिर से भिगाओ, मेरी चुरनरिया
फिर से भिगाओ, मेरी चुरनरिया
आओ माखन फिर से चुराओ, चाहे फिर यही पगली गुजरिया
चाहे फिर यही पगली गुजरिया
आओ मधुबन रास रचाओ,
आओ मधुबन रास रचाओ, ओ प्रेमावतारी
फिर मुरली अधर धरो गिरधारी
फिर मुरली अधर धरो गिरधारी
फिर मुरली अधर धरो गिरधारी
फिर मुरली अधर धरो गिरधारी